छोटे शहरों से बढ़ी मांग, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को मिला बढ़ावा

छोटे शहरों से बढ़ी मांग, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को मिला बढ़ावा

छोटे शहरों से बढ़ी मांग, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को मिला बढ़ावा
फेस्टिव सीजन के दौरान स्विगी, ज़ोमैटो और मैजिकपिन जैसे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर वॉल्यूम में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। किफायती ऑफर्स, बढ़ते यूजर बेस और छोटे शहरों से बढ़ती मांग ने अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में सेक्टर की ग्रोथ को गति दी।

भारत के फूड डिलीवरी सेक्टर में अक्टूबर–दिसंबर तिमाही के दौरान मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। प्रमुख प्लेटफॉर्म स्विगी, ज़ोमैटो और मैजिकपिन ने इस अवधि में ऑर्डर वॉल्यूम में बढ़ोतरी दर्ज की, जिसे त्योहारों की मांग, किफायती ऑफर्स और बढ़ते यूजर बेस से समर्थन मिला।

उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, साल की शुरुआत में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि के बाद इस तिमाही में सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर रहा। ऑर्डर में बढ़ोतरी का कारण प्रमोशनल प्राइसिंग, नए प्रोडक्ट फीचर्स और प्लेटफॉर्म्स द्वारा किए गए मार्केटिंग निवेश को माना जा रहा है।

मैजिकपिन  के फाउंडर और सीईओ अंशू शर्मा ने कहा कि अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही कंपनी के लिए बेहद मजबूत रही। उन्होंने बताया कि ऑर्डर स्तर पर यूनिट इकॉनॉमिक्स में 60% से अधिक सुधार हुआ है, जो बेहतर दक्षता और मजबूत मोनेटाइजेशन को दर्शाता है।

कंपनी के अनुसार Delhi NCR जैसे स्थापित बाजारों में स्थिर प्रदर्शन देखने को मिला, जबकि Bengaluru, Hyderabad और Mumbai जैसे बड़े शहरों में ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू में 40% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। औसत ऑर्डर वैल्यू 150 से 300 रुपये के बीच रहने से उपभोक्ताओं के बीच बार-बार ऑर्डर करने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

वहीं स्विगी ने अपनी Q3 FY26 अपडेट में बताया कि उसकी ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) सालाना आधार पर 20.5% बढ़कर 8,959 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे तेज वृद्धि है। कंपनी के मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता 22% बढ़कर 2.43 करोड़ तक पहुंच गए, जबकि कुल ऑर्डर 234 मिलियन से बढ़कर 294 मिलियन हो गए।

दूसरी ओर Zomato ने भी दिसंबर तिमाही में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी की नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) 16.6% बढ़कर 9,846 करोड़ रुपये हो गई, जबकि ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू में 21.3% की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान कंपनी के मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता 21% बढ़कर 2.49 करोड़ तक पहुंच गए।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अब मांग का बड़ा हिस्सा छोटे शहरों से भी आ रहा है। टियर-II और टियर-III शहरों में किफायती ऑफर्स के कारण उपभोक्ताओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच महानगरों से आगे बढ़कर नए बाजारों तक फैल रही है।

 

 

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