वर्ष 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अधिक देखने को मिलेगा। चैटजीपीटी (ChatGPT) और अन्य जेनरेटिव AI प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद से ही एआई (AI) तकनीक से जुड़ी हर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बीते साल में AI हमारे डिजिटल जीवन में गहराई से जुड़ता गया, बड़े परफॉर्मेंस अपग्रेड हुए, भारी निवेश देखने को मिला और कई नए उपयोग सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले साल में AI की रफ्तार और तेज़ होगी।
2025 में AI का सफर
2026 की बात करने से पहले, 2025 में AI इकोनॉमी में क्या हुआ, उस पर एक नज़र डालते हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में AI में निवेश तेज़ी से बढ़कर लगभग 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
ये निवेश डेटा सेंटर्स और सेमीकंडक्टर्स जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, AI एजेंट्स, सॉवरेन AI और साइबर सिक्योरिटी की बढ़ती मांग से प्रेरित रहे। बड़ी टेक कंपनियों ने AI में सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया, वहीं वेंचर कैपिटल फर्म्स ने भी इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाया।
भारत में भी ट्रेंड कुछ ऐसा ही रहा। हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में 17.5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की, जो एशिया में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। 2026 के मध्य तक माइक्रोसॉफ्ट का नया डेटा सेंटर शुरू होने के साथ भारत में उसकी हाइपरस्केल मौजूदगी सबसे बड़ी होगी। इससे भारत एक उभरते हुए AI राष्ट्र के रूप में सामने आ रहा है।
इसी तरह, अमेज़न ने अपने स्मभाव समिट में 2030 तक भारत में 35 अरब डॉलर से अधिक निवेश की योजना बताई, जिसमें बड़ा हिस्सा AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च होगा।
गूगल ने विशाखापट्टनम में 15 अरब डॉलर का AI डेटा हब स्थापित करने की योजना बनाई है, जबकि TCS ने AI डेटा सेंटर्स के लिए 7 अरब डॉलर तक के निवेश का संकेत दिया है।
वीसी फंडिंग की बात करें तो, अक्टूबर 2025 तक भारतीय AI स्टार्टअप्स में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश 5.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें से करीब 2.37 अरब डॉलर जेनरेटिव AI स्टार्टअप्स में लगाए गए।
2026 में AI: तेज़ रफ्तार और हाइपरग्रोथ
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में AI केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर लागू होगा। SAP Labs India की एमडी सिंधु गंगाधरन के अनुसार, “2026 की ओर बढ़ते हुए, भारत का टेक सेक्टर ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां केवल गति नहीं, बल्कि स्केल, जवाबदेही और ठोस नतीजे अहम होंगे। AI, क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी में मजबूत आधार तैयार हो चुका है। अब चुनौती इन क्षमताओं को स्थायी व्यावसायिक और सामाजिक प्रभाव में बदलने की है।”
पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेस के डायरेक्टर सज्जा प्रवीन चौधरी का कहना है कि 2026 तक भारत का एआई (AI) इकोसिस्टम विकास से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की ओर जाएगा। इससे निर्णय प्रक्रिया, जोखिम प्रबंधन और ग्राहक जुड़ाव में AI का इस्तेमाल बढ़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इसके साथ साइबर सुरक्षा, जिम्मेदारी और गवर्नेंस से जुड़े जोखिम भी बढ़ेंगे।
यूएसटी (UST) के चीफ AI आर्किटेक्ट डॉ. अदनान मसूद के मुताबिक,“2026 में कंपनियां AI से केवल वादे नहीं, बल्कि वास्तविक ROI की उम्मीद करेंगी। AI कोर बिज़नेस प्रोसेस का हिस्सा बनेगा और गवर्नेंस, ऑडिट और जिम्मेदारी इसकी सफलता तय करेंगी।”
2026 में AI और साइबर सुरक्षा
जहां AI के फायदे बढ़ेंगे, वहीं साइबर जोखिम भी सामने आएंगे। CrowdStrike के एडम मेयर्स का मानना है कि AI की वजह से 2026 में ज़ीरो-डे कमजोरियों में तेजी से इजाफा हो सकता है। वहीं Trend Micro की शारदा टिकू का कहना है कि AI अब प्रयोग से निकलकर बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, नियमन और एथिकल AI पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी होगा। कुल मिलाकर, 2026 AI के लिए एक निर्णायक साल साबित हो सकता है, जहां तकनीकी प्रगति और जिम्मेदार उपयोग दोनों साथ-साथ चलेंगे।