स्वाद से आगे: रेस्तरां में अनुभव और सेवा की बढ़ती भूमिका

स्वाद से आगे: रेस्तरां में अनुभव और सेवा की बढ़ती भूमिका

स्वाद से आगे: रेस्तरां में अनुभव और सेवा की बढ़ती भूमिका
आज के रेस्तरां उद्योग में ग्राहक अनुभव, स्वाद जितना ही अहम हो गया है, जहाँ सेवा, प्रक्रियाएँ, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी मिलकर भूमिका निभाते हैं।

आधुनिक रेस्तरां अब सिर्फ स्वाद या माहौल के आधार पर नहीं आंके जाते, बल्कि इस बात पर भी कि मेहमान हर टचपॉइंट पर कैसा महसूस करते हैं—टेबल बुक करने से लेकर भोजन के बाद फॉलो-अप तक। आज रेस्तरां में ग्राहक अनुभव बेहतर बनाना सोच-समझकर दी गई सेवा, स्मार्ट प्रक्रियाओं और अच्छी तरह प्रशिक्षित टीम का मेल है। प्रासंगिक बने रहने और ग्राहक वफादारी बढ़ाने के लिए रेस्तरां लोग, प्रक्रिया, तकनीक और डेटा को जोड़ने वाली संरचित रणनीतियाँ अपना रहे हैं। नीचे ऐसे ही प्रमुख फोकस क्षेत्र दिए गए हैं:

अनुभव पर ध्यान

रेस्तरां मानकीकृत प्रक्रियाएँ (SOPs), निरंतर प्रशिक्षण और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं के लगातार अपग्रेड के जरिए मेहमानों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं। एक सफल ऑपरेटर के लिए बेहतरीन अनुभव लगातार और एक समान होना चाहिए—यह स्टाफ पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

अच्छे अनुभव के लिए रेस्तरां मेहमान की पूरी यात्रा को ट्रैक करते हैं—कंसीयर्ज डेस्क पर प्रवेश से लेकर डाइनिंग और विदाई तक।

इस पर टिप्पणी करते हुए, प्रशांत चंद्रा, को-फाउंडर, अमीची ने कहा, “मेहमानों का स्वागत, टेबल अटेंड करना, खाने और कॉकटेल्स की सर्विस स्पीड, और विदाई—इन सभी के लिए SOPs तय हैं। इन्हें हर विज़िट में लगातार फॉलो किया जाता है ताकि मेहमानों को हर बार एक समान अनुभव मिले।”

मेहमानों की शिकायतों पर तुरंत ध्यान देना, सही संवाद और बारीकियों पर फोकस करना संतुष्टि और वफादारी को और बढ़ाता है।

कर्मचारी प्रशिक्षण को प्राथमिकता

टीम ट्रेनिंग हर स्पेस की पर्सनैलिटी समझने पर केंद्रित होती है—चाहे वह ब्रूहाउस हो, टैरेस हो या हाई-एनर्जी सोशल ज़ोन—ताकि सेवा मेहमानों के मूड के अनुरूप और सहज लगे।

शरथ टी. गौड़ा, फाउंडर, एरीना ब्रूहाउस ने कहा,“हमारी टीमें संरचित ऑनबोर्डिंग और नियमित स्किल-बिल्डिंग सेशंस से गुजरती हैं, जिनमें मेन्यू स्टोरीटेलिंग, बेवरेज नॉलेज, सर्विस पेसिंग और क्राउड मैनेजमेंट शामिल है। मजबूत SOPs और टेक्नोलॉजी-सपोर्टेड ऑर्डर मैनेजमेंट से ऑपरेशंस सुचारू होते हैं, रुकावटें कम होती हैं और अधिक भीड़ के दौरान भी सेवा सहज बनी रहती है।”

युकी के लिए फोकस एक सहज डाइनिंग जर्नी बनाना है, जहाँ मेहमान हर टचपॉइंट पर स्वागत, समझ और देखभाल महसूस करें।

इस पर प्रियेश बुसेट्टी, को-फाउंडर, युकी ने जोड़ा,“हम स्टाफ ट्रेनिंग में भरपूर निवेश करते हैं—सिर्फ मेन्यू और सर्विस प्रोटोकॉल ही नहीं, बल्कि गेस्ट एंगेजमेंट और प्रॉब्लम सॉल्विंग पर भी। नियमित ट्रेनिंग सेशंस, प्री-सर्विस ब्रीफिंग्स और हैंड्स-ऑन मेंटरिंग से हर शिफ्ट में सर्विस स्टैंडर्ड्स बनाए रहते हैं।”

पर्सनलाइज़ेशन की ताकत

पर्सनलाइज़ेशन अवलोकन और याददाश्त से आता है—पसंद याद रखना, स्वाद को पहचाने गए पैलेट के अनुसार एडजस्ट करना और ज़रूरत पड़ने पर सोच-समझकर ऑफ-मेन्यू सुझाव देना।गुणवत्ता से समझौता किए बिना लचीलापन प्रोत्साहित किया जाता है।

बुसेट्टी ने कहा,“हमारी टीमें पसंद याद रखने, पिछली विज़िट के आधार पर डिशेज़ सुझाने और अलग-अलग गेस्ट प्रोफाइल के अनुसार सर्विस स्टाइल एडॉप्ट करने के लिए प्रोत्साहित की जाती हैं।”

फीडबैक का महत्व

कस्टमर फीडबैक सीधे तौर पर मेन्यू सुधार, सर्विस ट्रेनिंग और समग्र अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करता है। लॉयल्टी इनिशिएटिव्स और रिपीट गेस्ट रिकग्निशन से ग्राहकों के साथ रिश्ते और मज़बूत होते हैं, जिससे अनुभव ज्यादा सोच-समझकर और अपनापन लिए हुए बनते हैं।

दिव्या कदम, फाउंडर, बालिबू और बोडेगा 39 ने कहा,“फीडबैक को भावनात्मक नहीं, गंभीरता से लिया जाता है। हम फ्लोर और ऑनलाइन दोनों जगह सुनते हैं, पैटर्न पहचानते हैं और तुरंत कार्रवाई करते हैं। इससे सर्विस पेसिंग, मेन्यू बदलाव और ज़रूरत पड़ने पर टीम री-ट्रेनिंग होती है।”

बुसेट्टी ने साझा किया कि वे व्यक्तिगत बातचीत, ऑनलाइन रिव्यू और रिपीट गेस्ट इंटरैक्शन के जरिए सक्रिय रूप से इनपुट इकट्ठा करते हैं और नियमित रूप से इसकी समीक्षा कर सुधार के क्षेत्र पहचानते हैं।

रेस्तरां फीडबैक ट्रेंड्स—जैसे बार-बार आने वाली शिकायतें—को भी ट्रैक करते हैं, ताकि मुद्दों को समय पर सुलझाया जा सके। चंद्रा ने बताया कि फीडबैक का जवाब देना और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाना गेस्ट ट्रस्ट और लॉयल्टी बनाता है।

गेस्ट एक्सपीरियंस मैट्रिक्स की ट्रैकिंग

रेस्तरां रिपीट विज़िट रेट, शिकायत समाधान समय और ऑनलाइन रेटिंग ट्रेंड्स जैसे गेस्ट मैट्रिक्स का उपयोग करते हैं। टेबल टर्नओवर और ऑर्डर एक्यूरेसी जैसे ऑपरेशनल मैट्रिक्स के साथ इंटरैक्शन और फीडबैक मिलकर बेहतरीन सेवा को मापने योग्य और दोहराने योग्य बनाते हैं।

गौड़ा ने कहा,“हम गेस्ट सेंटिमेंट और अनुभव पैटर्न ट्रैक कर ऑफरिंग्स सुधारते हैं, सर्विस टचपॉइंट्स बेहतर करते हैं और माहौल को निखारते हैं। लॉयल्टी प्रोग्राम्स, क्यूरेटेड एक्सपीरियंस और रिपीट गेस्ट रिकग्निशन से हम लंबे रिश्ते बनाते हैं।”

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs)

रेस्तरां ऑर्डर फ्लो, टेबल टर्नओवर, बिलिंग और क्लीनिंग जैसे कार्यों के लिए स्पष्ट SOPs अपनाते हैं। POS सिस्टम, किचन डिस्प्ले स्क्रीन, QR मेन्यू और इन्वेंट्री टूल्स जैसी तकनीक गलतियों को कम करती है और फ्रंट व बैक ऑफ हाउस के बीच बेहतर तालमेल बनाती है। नियमित रिव्यू मीटिंग्स और परफॉर्मेंस मैट्रिक्स से बॉटलनेक्स पहचानकर सुधार किए जाते हैं।

चंद्रा ने कहा कि जो रेस्तरां गेस्ट एक्सपीरियंस और संतुष्टि में उत्कृष्ट होते हैं, उनके पास आमतौर पर अच्छा वर्क कल्चर, मजबूत ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स और सुदृढ़ प्रक्रियाएँ होती हैं, जो बेहतरीन ऑपरेशंस और अनुभव सुनिश्चित करती हैं।

कदम ने जोड़ा, “डेटा हमें सूचित फैसले लेने में मदद करता है, लेकिन हॉस्पिटैलिटी सबसे पहले एक मानवीय व्यवसाय है।” वहीं बुसेट्टी ने कहा कि ये प्रक्रियाएँ वेट टाइम कम करती हैं, खाने की गुणवत्ता में निरंतरता बनाए रखती हैं और पीक आवर्स में भी शांत, सजग सेवा माहौल सुनिश्चित करती हैं।

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