क्योरफूड्स का मल्टी-ब्रांड विस्तार हाइपरप्योर के सपोर्ट से मजबूत

क्योरफूड्स का मल्टी-ब्रांड विस्तार हाइपरप्योर के सपोर्ट से मजबूत

क्योरफूड्स का मल्टी-ब्रांड विस्तार हाइपरप्योर के सपोर्ट से मजबूत
क्योरफूड्स ने हाइपरप्योर के सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट सिस्टम के साथ साझेदारी कर अपने मल्टी-ब्रांड विस्तार को मजबूती दी है। इंटीग्रेटेड बैकएंड सिस्टम और ऑटोमेशन से कंपनी ने क्वालिटी, मानकीकरण और बड़े पैमाने पर ऑपरेशन को आसानी से संभाला।

क्योरफूड्स द्वारा कई फूड ब्रांड्स में किए जा रहे तेज़ विस्तार को हाइपरप्योर की सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से मजबूत समर्थन मिल रहा है। यह साझेदारी हॉस्पिटैलिटी और फूडसर्विस इंडस्ट्री में एक ऐसे बैकएंड ऑपरेटिंग मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसे बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। तकनीक आधारित खरीद और गुणवत्ता नियंत्रण के ज़रिये यह सहयोग बिना ऑपरेशनल दबाव के मेन्यू विविधता और स्केल को संभव बना रहा है।

क्योरफूड्स के संस्थापक अंकित एन. पहले कह चुके हैं कि यदि कोई पिज़्ज़ा ब्रांड बर्गर बेचना शुरू करता है, तो हाइपरप्योर को उस बदलाव को सपोर्ट करने में सक्षम होना चाहिए। यही सोच तब ज़मीनी स्तर पर दिखी, जब ओलियो पिज़्ज़ा ने फैट बर्गर के ज़रिये बर्गर सेगमेंट में विस्तार किया। इस दौरान दोनों ब्रांड्स क्योरफूड्स पोर्टफोलियो के तहत एक साथ स्केल हुए और हाइपरप्योर ने 500 से अधिक आउटलेट्स में एक समान सोर्सिंग और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखा।

इस साझेदारी का एक अहम पहलू क्योरफूड्स की सेंट्रल किचन पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) सिस्टम और हाइपरप्योर के प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म के बीच किया गया इंटीग्रेशन है। इस सिस्टम के तहत परचेज ऑर्डर जारी करने से लेकर गुड्स रिसीव्ड नोट (GRN) बनाने तक की पूरी प्रक्रिया ऑटोमेट हो जाती है। मैनुअल हस्तक्षेप खत्म होने से न सिर्फ गलतियों में कमी आई है, बल्कि बड़े स्तर पर मानकीकरण भी संभव हुआ है। इसे भारत के संगठित फूडसर्विस इकोसिस्टम में अपनी तरह की शुरुआती पहलों में से एक माना जा रहा है।

ऑपरेशनल अनुशासन और फूड सेफ्टी इस सहयोग के केंद्र में हैं। अंकित एन. ने पहले भी फूड क्वालिटी को लेकर बेहद सतर्क रहने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है, और यही सोच हाइपरप्योर के कामकाज में भी दिखाई देती है। “ओनली द पैरानॉयड सर्वाइव” जैसी सोच हाइपरप्योर की आंतरिक संस्कृति को दर्शाती है, जिसमें सप्लाई चेन के हर स्तर पर नियंत्रण, ट्रेसबिलिटी और प्रक्रिया के पालन पर ध्यान दिया जाता है।

हाइपरप्योर का कुलिनरी डेवलपमेंट सेंटर भी इस साझेदारी में अहम भूमिका निभा रहा है, जहाँ मेन्यू डेवलपमेंट के साथ-साथ अलग-अलग लोकेशनों और फॉर्मैट्स में एकरूपता सुनिश्चित की जाती है। क्योरफूड्स के साथ यह सहयोग दिखाता है कि अब केवल फ्रंटएंड ब्रांडिंग नहीं, बल्कि मजबूत बैकएंड सिस्टम भी भारत के संगठित एफ एंड बी सेक्टर में टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी होते जा रहे हैं।

जैसे-जैसे क्योरफूड्स अपने मल्टी-ब्रांड पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहा है, हाइपरप्योर के साथ मिलकर बनाया गया यह ऑपरेशनल फ्रेमवर्क तेज़ी से बढ़ने वाले फूड बिज़नेस के लिए एक स्केलेबल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह साझेदारी इंडस्ट्री में उस बदलाव को रेखांकित करती है, जहाँ प्रोक्योरमेंट ऑटोमेशन और इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन भविष्य की प्रतिस्पर्धा के अहम कारक बनते जा रहे हैं।

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