एवर्स्टोन कैपिटल भारत और इंडोनेशिया में बर्गर किंग की मास्टर फ्रेंचाइज़ी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया लिमिटेड (RBA) में किए गए अपने निवेश से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत एवर्स्टोन अपनी पूरी 11.26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है। रिफिनिटिव के आंकड़ों के आधार पर इस हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 57 मिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया है और इस संबंध में घोषणा मंगलवार तक किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस प्रस्तावित लेनदेन से कंपनी में एक नया रणनीतिक शेयरधारक आने की संभावना है। बताया जा रहा है कि अजंता फार्मा के प्रमोटर्स के फैमिली ऑफिस इस निवेश के लिए सबसे आगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अजंता परिवार का फैमिली ऑफिस रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया में लगभग 800 करोड़ रुपये (करीब 88 मिलियन डॉलर) तक के निवेश का मूल्यांकन कर रहा है।
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यह निवेश इस तरह संरचित किया जा सकता है कि समय के साथ हिस्सेदारी को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सके। ऐसे में, जैसे-जैसे अन्य निवेशक अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे, अजंता परिवार के पास भविष्य में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने का रास्ता भी खुल सकता है। यह संभावित बदलाव रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर और रणनीतिक दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
भारतीय शेयर बाज़ारों को दी गई जानकारी के अनुसार, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया लिमिटेड ने 20 जनवरी को एक बोर्ड बैठक तय की है, जिसमें कंपनी फंड जुटाने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार और उनका मूल्यांकन करेगी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर एवर्स्टोन कैपिटल, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया और अजंता परिवार के फैमिली ऑफिस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
लगभग 437 मिलियन अमेरिकी डॉलर के मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया भारत के तेजी से बदलते क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) परिदृश्य में काम कर रही है, जहां एकीकरण, पूंजी निवेश और स्वामित्व में बदलाव अब आम होते जा रहे हैं। एवर्स्टोन का संभावित एग्ज़िट इसी व्यापक रुझान को दर्शाता है, जिसमें प्राइवेट इक्विटी निवेशक बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बड़े पैमाने की जरूरतों को देखते हुए अपने पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।
यदि अजंता प्रमोटर्स का फैमिली ऑफिस बड़े निवेश के साथ आगे बढ़ता है और समय के साथ नियंत्रण अपने हाथ में लेता है, तो यह प्राइवेट इक्विटी-नेतृत्व वाले स्वामित्व से प्रमोटर-आधारित रणनीतिक नियंत्रण की ओर एक अहम बदलाव का संकेत होगा। यह प्रवृत्ति घरेलू पूंजी के उपभोक्ता-केंद्रित व्यवसायों में बढ़ते प्रवाह के साथ और अधिक स्पष्ट होती जा रही है। रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के लिए, ताज़ा पूंजी का संभावित निवेश आउटलेट विस्तार, बाज़ार में उपस्थिति को मजबूत करने और बड़े सूचीबद्ध QSR ऑपरेटरों के साथ प्रतिस्पर्धा को और तेज़ करने में मदद कर सकता है।
यह घटनाक्रम सेक्टर में चल रही व्यापक गतिविधियों को भी दर्शाता है, जहां सैफायर फूड्स और देवयानी इंटरनेशनल जैसे प्रतिस्पर्धी भी भारत के तेजी से बढ़ते फास्ट-फूड बाज़ार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए विलय, अधिग्रहण और फंडरेज़िंग के विकल्प तलाश रहे हैं। अब बाज़ार की निगाहें 20 जनवरी की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं, जहां फंडिंग की संरचना, एवर्स्टोन के एग्ज़िट की शर्तों और अजंता फैमिली ऑफिस की दीर्घकालिक रणनीति से जुड़े अहम संकेत मिलने की उम्मीद है।