भारत में हर वर्ष लाखों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं, लेकिन उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में शिक्षा और रोजगार के बीच की इस खाई को पाटने के लिए विश्वविद्यालयों, उद्योगों और एडटेक कंपनियों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
इसी विषय पर Entrepreneur India से विशेष बातचीत में TeamLease EdTech के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शांतनु रूज ने रोजगारपरक शिक्षा, ऑनलाइन डिग्री, अप्रेंटिसशिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उद्योग-शिक्षा साझेदारी और भारत के भविष्य के कार्यबल को तैयार करने की रणनीति पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
प्रश्न 1. भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच कौशल अंतर (Skill Gap) को कम करने में TeamLease EdTech की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है?
शांतनु रूज: भारत में रोजगार से जुड़ी चुनौती का समाधान किसी एक पहल से संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षा से लेकर रोजगार तक एक मजबूत और समग्र व्यवस्था (Education-to-Employment Architecture) तैयार करने की आवश्यकता है। TeamLease EdTech इसी सोच के साथ काम कर रहा है।
हमारी रणनीति तीन प्रमुख स्तंभों Prepare, Repair और Upgrade पर आधारित है। 'Prepare' के तहत हम विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ऐसे डिग्री कार्यक्रम तैयार करते हैं, जो छात्रों को रोजगार के लिए बेहतर ढंग से तैयार करें। 'Repair' के माध्यम से हम उद्योगों के साथ मिलकर प्रशिक्षण (Training) और अप्रेंटिसशिप के जरिए कौशल की कमी को दूर करते हैं। वहीं 'Upgrade' के तहत कार्यरत पेशेवरों को बदलती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप नए कौशल सीखने में मदद करते हैं।
हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि हमने शिक्षा और रोजगार को दो अलग-अलग प्रक्रियाओं के बजाय एक-दूसरे से जुड़ी हुई व्यवस्था के रूप में विकसित किया है। हमारा मानना है कि छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कार्यस्थल का अनुभव भी साथ-साथ मिलना चाहिए।
इसी सोच के आधार पर हमने Work-Integrated Learning और Apprenticeship-Linked Degree Programmes जैसे मॉडल विकसित किए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक कार्य अनुभव भी प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी रोजगार क्षमता (Employability) कई गुना बढ़ जाती है।
आज TeamLease EdTech देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों, हजारों कॉरपोरेट संगठनों और लाखों शिक्षार्थियों के साथ मिलकर ऐसा शिक्षा मॉडल विकसित कर रहा है, जिसमें डिग्री सीधे करियर और रोजगार से जुड़ती है। हमारा विश्वास है कि यह मॉडल आने वाले वर्षों में भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लाएगा, जहाँ केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार होना सफलता का वास्तविक पैमाना होगा।
प्रश्न 2. अगले तीन से पाँच वर्षों के लिए TeamLease EdTech की प्रमुख विकास रणनीति क्या होगी?
शांतनु रूज: अगले कुछ वर्षों में भारत का विकसित राष्ट्र बनने का सपना काफी हद तक उसकी युवा कार्यशक्ति (Workforce) की गुणवत्ता, उत्पादकता और रोजगार क्षमता पर निर्भर करेगा। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, लेकिन यह जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) तभी आर्थिक शक्ति में बदल सकता है, जब युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल और अवसर उपलब्ध कराए जाएँ। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए TeamLease EdTech अपनी विकास रणनीति तैयार कर रहा है। हमारा उद्देश्य शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत पुल तैयार करना है, ताकि विश्वविद्यालय, छात्र और उद्योग एक साझा मंच पर आ सकें।
हम आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करेंगे, जो सीधे रोजगार से जुड़े हों। साथ ही छात्रों को लचीली (Flexible), परिणाम-आधारित (Outcome-Oriented) और उद्योग-केंद्रित शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देंगे। इसके अलावा, कंपनियों को बेहतर प्रतिभा (Talent) उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप और कार्य-अनुभव आधारित कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाएगा।
हमारा फोकस Work-Integrated Degree Programmes, Apprenticeship Models, Online & Blended Learning, Corporate Skilling तथा Digivarsity जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों को सही करियर विकल्पों से जोड़ने पर रहेगा। इसके साथ ही, हमें Artificial Intelligence (AI), Data Science, Cybersecurity, Semiconductor, FinTech, Supply Chain, Healthcare Technology और Digital Business जैसे उभरते क्षेत्रों में भी तेजी से अवसर दिखाई दे रहे हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में नए कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, ताकि छात्र भविष्य की नौकरियों के लिए पहले से तैयार हो सकें।
हमारा उद्देश्य केवल TeamLease EdTech का विस्तार करना नहीं है, बल्कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को इस तरह बदलना है कि शिक्षा सीधे करियर निर्माण और रोजगार से जुड़ सके। हमारा मानना है कि भविष्य की शिक्षा वही होगी, जो छात्रों को केवल डिग्री नहीं, बल्कि सफल करियर बनाने की क्षमता भी प्रदान करे।
प्रश्न 3. ऑनलाइन डिग्री और अप्रेंटिसशिप मॉडल भारत में रोजगार और कार्यबल (Workforce) के भविष्य को किस तरह बदल सकते हैं?
शांतनु रूज: भारत जैसे विशाल देश में उच्च शिक्षा तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना आज भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रम उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके माध्यम से छोटे शहरों और दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और अनुभवी शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, केवल ऑनलाइन शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है। यदि पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव न मिले, तो छात्रों के लिए उद्योग की वास्तविक जरूरतों को समझना कठिन हो जाता है। इसलिए हमारा मानना है कि ऑनलाइन डिग्री को अप्रेंटिसशिप और वर्क-इंटीग्रेटेड लर्निंग के साथ जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस मॉडल में छात्र विश्वविद्यालय से सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करते हैं, जबकि उद्योगों में काम करके वास्तविक कार्य-अनुभव भी हासिल करते हैं। इससे वे पढ़ाई के दौरान ही कार्यस्थल की संस्कृति, अनुशासन, टीमवर्क और उद्योग की अपेक्षाओं को समझने लगते हैं।
इसका लाभ केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि उद्योगों को भी मिलता है। कंपनियों को पहले से प्रशिक्षित और कार्य के लिए तैयार प्रतिभाएं (Work-Ready Talent) मिलती हैं, जिससे भर्ती के बाद अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता कम हो जाती है। वहीं छात्रों के लिए डिग्री केवल एक शैक्षणिक योग्यता नहीं रहती, बल्कि सफल करियर की मजबूत शुरुआत बन जाती है।
मेरा मानना है कि भविष्य में रोजगार क्षमता केवल डिग्री से तय नहीं होगी, बल्कि इस बात से होगी कि छात्र ने पढ़ाई के दौरान कितना व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया है। यही कारण है कि आने वाले समय में ऑनलाइन शिक्षा, अप्रेंटिसशिप और उद्योग-अनुभव का संयोजन भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा परिवर्तन लेकर आएगा।
प्रश्न 4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती तकनीकों के दौर में छात्रों को भविष्य के करियर के लिए तैयार करने के लिए TeamLease EdTech कौन-सी नई पहल कर रहा है?
शांतनु रूज: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकें आज केवल उद्योगों को ही नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार की पूरी व्यवस्था को बदल रही हैं। ऐसे में हमारा प्रयास केवल छात्रों को इन तकनीकों की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक उद्योगों में इनका प्रभावी उपयोग करना भी सिखाना है।
इसी उद्देश्य से TeamLease EdTech देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों, IITs, IIITs, IIMs और अन्य प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर Artificial Intelligence, Machine Learning, Cybersecurity, Data Science, FinTech, Healthcare Technology, Internet of Things (IoT), Semiconductor, Cloud Computing और Digital Business जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम संचालित कर रहा है।
हमारा मानना है कि AI केवल कंप्यूटर साइंस के छात्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आने वाले समय में कॉमर्स, मैनेजमेंट, हेल्थकेयर, फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स, ह्यूमन रिसोर्स (HR) और लगभग हर क्षेत्र के पेशेवरों के लिए AI की समझ आवश्यक होगी। इसलिए हम विभिन्न विषयों के छात्रों को भी AI और डिजिटल तकनीकों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
Digivarsity और हमारे विश्वविद्यालय साझेदारों के माध्यम से छात्रों को न केवल उपयुक्त कोर्स चुनने में सहायता मिलती है, बल्कि उन्हें विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी और उद्योग की बदलती मांग के अनुसार आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर भी मिलता है।
हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता तकनीक की केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे रोजगार से जोड़ना है। छात्र यह समझें कि AI केवल एक तकनीक नहीं है, बल्कि यह निर्णय लेने, उत्पादकता बढ़ाने, ग्राहक अनुभव बेहतर बनाने, अनुसंधान को गति देने और व्यवसाय को अधिक प्रभावी बनाने का एक सशक्त माध्यम है।
आज उद्योग ऐसे युवाओं की तलाश में हैं, जो तकनीक का उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए कर सकें। इसलिए हमारा लक्ष्य ऐसे Future-Ready Professionals तैयार करना है, जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, समस्या समाधान की क्षमता और बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को लगातार विकसित करने का दृष्टिकोण भी हो।
प्रश्न 5. विश्वविद्यालयों, नियोक्ताओं (Employers) और उद्योग जगत के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए TeamLease EdTech की क्या रणनीति है?
शांतनु रूज: हमारे लिए साझेदारी (Partnership) केवल एक व्यावसायिक मॉडल नहीं, बल्कि रोजगारपरक शिक्षा (Employability) की सबसे मजबूत नींव है। मेरा मानना है कि किसी एक संस्था के प्रयासों से युवाओं को रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार नहीं किया जा सकता। इसके लिए विश्वविद्यालयों, उद्योगों और तकनीकी प्लेटफॉर्म्स को मिलकर काम करना होगा।
विश्वविद्यालय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत अकादमिक आधार प्रदान करते हैं। वहीं उद्योग यह बताते हैं कि वर्तमान और भविष्य में किस तरह के कौशल की आवश्यकता होगी। हमारी भूमिका इन दोनों के बीच एक प्रभावी सेतु (Bridge) का काम करने की है। हम तकनीक, प्रोग्राम मैनेजमेंट, स्किल डेवलपमेंट, अप्रेंटिसशिप और छात्रों को आवश्यक सहयोग प्रदान करके शिक्षा और उद्योग को जोड़ते हैं।
आज देश के कई विश्वविद्यालय हमारे साथ जुड़ने में रुचि दिखा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमने रोजगार-केंद्रित (Employability-Focused) शिक्षा मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया है। हालांकि हमारा उद्देश्य केवल अधिक से अधिक संस्थानों के साथ जुड़ना नहीं है, बल्कि ऐसे विश्वविद्यालयों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करना है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों के बेहतर भविष्य के प्रति हमारी सोच साझा करते हों।
दूसरी ओर, उद्योगों की अपेक्षाएँ भी तेजी से बदल रही हैं। आज कंपनियां केवल डिग्रीधारी उम्मीदवार नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं की तलाश में हैं जो पहले दिन से कार्य करने के लिए तैयार हों। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हम विभिन्न उद्योगों और कॉरपोरेट संगठनों के साथ अपनी साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
अप्रेंटिसशिप, वर्क-इंटीग्रेटेड लर्निंग, कॉरपोरेट स्किलिंग और परिणाम-आधारित (Outcome-Based) कार्यक्रमों के माध्यम से हम उद्योगों के लिए बेहतर प्रतिभा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। अंततः हमारी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यही होगा कि हमारे प्लेटफॉर्म से जुड़े छात्रों को बेहतर रोजगार मिले और उद्योगों को कुशल एवं सक्षम कार्यबल प्राप्त हो।
प्रश्न 6. TeamLease EdTech के निरंतर विस्तार के बीच भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक अवसरों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने को लेकर आपकी क्या रणनीति है?
शांतनु रूज: वर्तमान समय में TeamLease EdTech का पूरा ध्यान भारत पर केंद्रित है। हमारा मानना है कि देश में अभी भी उच्च शिक्षा, रोजगारपरक शिक्षा, अप्रेंटिसशिप, वर्क-इंटीग्रेटेड लर्निंग और कार्यबल की उत्पादकता जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए हमारी पहली प्राथमिकता भारत के युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना है। हालांकि, यह भी सच है कि भारतीय प्रतिभा (Indian Talent) की मांग अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही। दुनिया के कई देशों में भारतीय पेशेवर तकनीक, हेल्थकेयर, फाइनेंस, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल बिजनेस और अन्य उभरते क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जिनके कौशल केवल भारतीय उद्योगों की जरूरतों तक सीमित न हों, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों। इसके लिए हम ऐसे शिक्षा कार्यक्रम विकसित कर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों और छात्रों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करें।
भविष्य में हम अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग, वैश्विक करियर अवसरों और विश्वस्तरीय शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य करेंगे। हालांकि हमारा विस्तार चरणबद्ध (Phased) और संतुलित होगा।
हमारा मानना है कि किसी भी वैश्विक विस्तार से पहले भारत में मजबूत आधार तैयार करना अधिक आवश्यक है। जब हम यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मजबूत उद्योग साझेदारी और बड़े स्तर पर रोजगारपरक मॉडल स्थापित कर लेंगे, तब वैश्विक स्तर पर विस्तार हमारे लिए स्वाभाविक अगला कदम होगा। हमारा अंतिम उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना नहीं है, बल्कि भारतीय युवाओं को ऐसे कौशल और अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे दुनिया के किसी भी हिस्से में सफलता हासिल कर सकें।
प्रश्न 7. जब आप अपनी उद्यमशील (Entrepreneurial) यात्रा को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो TeamLease EdTech को खड़ा करने में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या रहीं? इन चुनौतियों से उबरने में आपकी नेतृत्व शैली, रणनीति और सहयोगी तंत्र (Support System) ने किस तरह मदद की?
शांतनु रूज: किसी भी स्टार्टअप की शुरुआत केवल एक व्यवसाय खड़ा करने से नहीं होती, बल्कि लोगों के मन में एक नए विचार पर विश्वास पैदा करने से होती है। TeamLease EdTech की यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही। जब हमने इस क्षेत्र में काम शुरू किया था, तब उच्च शिक्षा, ऑनलाइन लर्निंग, अप्रेंटिसशिप और रोजगार क्षमता (Employability) को अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जाता था। विश्वविद्यालयों का ध्यान केवल शिक्षा देने पर था, उद्योग भर्ती तक सीमित थे और छात्रों को इन दोनों के बीच की दूरी स्वयं तय करनी पड़ती थी।
हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि शिक्षा और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़ने वाली सोच विकसित की जाए। हमारा उद्देश्य यह समझाना था कि रोजगार क्षमता किसी छात्र को डिग्री मिलने के बाद विकसित नहीं की जा सकती, बल्कि उसे शिक्षा के दौरान ही तैयार करना होगा। इसी सोच के साथ हमने विश्वविद्यालयों, उद्योगों और छात्रों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया।
दूसरी बड़ी चुनौती बड़े स्तर (Scale) पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना था। शिक्षा ऐसा क्षेत्र है, जहां विश्वास (Trust) सबसे महत्वपूर्ण होता है। विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उद्योग चाहते हैं कि उन्हें कार्य के लिए तैयार प्रतिभाएं मिलें और छात्र यह भरोसा चाहते हैं कि जिस कार्यक्रम में वे शामिल हो रहे हैं, उससे उनके करियर को वास्तविक लाभ मिलेगा।
ऐसे विश्वास का निर्माण एक दिन में संभव नहीं होता। इसके लिए लगातार बेहतर प्रदर्शन, पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। हमने धैर्य, निरंतरता और परिणामों पर आधारित कार्यशैली के माध्यम से यह विश्वास अर्जित किया है।
यदि मैं अपनी नेतृत्व शैली की बात करूं, तो मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत 'उद्देश्य की स्पष्टता' (Clarity of Purpose) रहा है। हमारा लक्ष्य शुरू से ही 'Making India Employable' रहा है और यही सोच हर निर्णय में हमारी मार्गदर्शक बनी। बदलते बाजार, नई तकनीकों और कई परिचालन चुनौतियों के बावजूद हमने अपने मूल उद्देश्य से कभी समझौता नहीं किया।
इस यात्रा में हमारी मजबूत टीम, विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी, उद्योग जगत का सहयोग और TeamLease समूह का अनुभव भी हमारी सबसे बड़ी ताकत रहा है। हमने हमेशा छात्रों को केंद्र में रखकर काम किया और प्रत्येक निर्णय इस आधार पर लिया कि उससे छात्रों के करियर और रोजगार क्षमता में कितना सुधार होगा।
मेरा मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में उद्यमिता केवल तेज़ी से आगे बढ़ने का नाम नहीं है। यहां धैर्य, विश्वास, साझेदारी और दीर्घकालिक सोच की उतनी ही आवश्यकता होती है, जितनी नवाचार और महत्वाकांक्षा की। जब उद्देश्य स्पष्ट हो, सही सहयोगी साथ हों और लगातार बेहतर परिणाम देने की प्रतिबद्धता हो, तभी बड़े स्तर पर परिवर्तन संभव होता है।
निष्कर्ष : भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में केवल उच्च शिक्षा का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि छात्रों को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें बदलती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगार के लिए तैयार कर सके। इसी दिशा में TeamLease EdTech शिक्षा, उद्योग और तकनीक के बीच मजबूत सेतु का कार्य कर रहा है।
Entrepreneur India से बातचीत में शांतनु रूज ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में केवल डिग्री प्राप्त करना सफलता का पैमाना नहीं होगा। वास्तविक सफलता उस शिक्षा की होगी, जो छात्रों को व्यावहारिक अनुभव, डिजिटल दक्षता, उद्योग से जुड़ाव और रोजगारपरक कौशल प्रदान करे। उनके अनुसार, ऑनलाइन शिक्षा, अप्रेंटिसशिप, वर्क-इंटीग्रेटेड लर्निंग, AI आधारित शिक्षा और विश्वविद्यालय-उद्योग साझेदारी भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बनने जा रहे हैं।
उनका मानना है कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति है। यदि इस युवा शक्ति को सही कौशल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उद्योगों से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराया जाए, तो यही जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है। इसी सोच के साथ TeamLease EdTech 'Making India Employable' के अपने विज़न को आगे बढ़ाते हुए भविष्य की कार्यशक्ति तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।