भारत तेजी से ज्ञान-आधारित (Knowledge-driven) अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अब विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रह गई है। आज उनसे ऐसे इनोवेटर, उद्यमी (Entrepreneurs), शोधकर्ता (Researchers) और समस्या समाधान करने वाले युवाओं को तैयार करने की उम्मीद की जा रही है, जो वास्तविक चुनौतियों का समाधान कर सकें।
इसी बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं अमिटी इनोवेशन इनक्यूबेटर (Amity Innovation Incubator - AII) के सीईओ ओजस्वी बब्बर (Ojasvi Babber) - इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और स्टार्टअप कंसल्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले बब्बर पिछले बीस वर्षों से उद्यमियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने शुरुआती चरण के कई स्टार्टअप्स को निवेश दिलाने और उन्हें सफल व्यवसाय बनाने में मदद की है।
उनके नेतृत्व में, नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission) के सहयोग से संचालित अमिटी इनोवेशन इनक्यूबेटर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालय-आधारित इनक्यूबेशन केंद्रों में शामिल हो चुका है। यह कई कैंपसों में फिजिकल और वर्चुअल दोनों तरह के इनक्यूबेशन प्रोग्राम चलाता है, जहां स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, बौद्धिक संपदा (IP) सहायता, तकनीकी विकास, नियामकीय मार्गदर्शन, निवेशकों से जुड़ने और बाजार में प्रवेश की रणनीति जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। बब्बर Amity Capital Ventures का भी नेतृत्व करते हैं, जो अमिटी इकोसिस्टम के स्टार्टअप्स में निवेश करता है।
Entrepreneur India से विशेष बातचीत में ओजस्वी बब्बर ने विश्वविद्यालयों की बदलती भूमिका, रोजगार योग्य कौशल (Employability), AI आधारित शिक्षा, विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर्स और भारत में मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम पर अपने विचार साझा किए।
प्रश्न 1. भारत जब ज्ञान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, तो विश्वविद्यालयों की भूमिका को आप किस तरह बदलते हुए देखते हैं?
ओजस्वी बब्बर का मानना है कि भारत के ज्ञान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनने के लिए विश्वविद्यालयों को अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़ना होगा। अब वे केवल पढ़ाई और डिग्री देने वाले संस्थान नहीं रह सकते, बल्कि उन्हें नवाचार, उद्यमिता, शोध और वास्तविक समस्याओं के समाधान के केंद्र बनना होगा। वे कहते हैं, "आज विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्हें ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां नए विचारों को बढ़ावा मिले, नवाचार को प्रोत्साहन मिले और छात्र वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रेरित हों।"
बब्बर का मानना है कि Startup India जैसी पहल ने युवाओं की सोच में बड़ा बदलाव लाया है। अब छात्र नौकरी के साथ-साथ उद्यमिता को भी एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में देखने लगे हैं और पढ़ाई के दौरान ही अपने बिजनेस आइडिया पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों को केवल मैनेजमेंट या टेक्नोलॉजी छात्रों तक ही उद्यमिता को सीमित नहीं रखना चाहिए। हर विषय के छात्रों को रचनात्मक सोच विकसित करने, नए अवसर तलाशने और इनोवेटिव समाधान तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
बब्बर यह भी कहते हैं कि विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध तभी सार्थक होगा, जब वह पेटेंट, नए उत्पादों, सफल स्टार्टअप्स और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में बदले। इसके लिए विश्वविद्यालयों को ऐसा इनोवेशन इकोसिस्टम बनाना होगा, जहां छात्र, शोधकर्ता, उद्योग, निवेशक, मेंटर्स और नीति निर्माता मिलकर काम करें। वे बताते हैं कि Amity Innovation Incubator में मजबूत मेंटरशिप, उद्योग साझेदारी, शुरुआती निवेश और बाजार से जुड़ाव ने कई छात्र-आधारित स्टार्टअप्स को सफल व्यवसायों में बदलने में मदद की है।
बब्बर कहते हैं, "अगले दशक में वही विश्वविद्यालय भारत की पहचान बनेंगे, जो शिक्षा, शोध, नवाचार और उद्यमिता को एक ही इकोसिस्टम का हिस्सा बना देंगे।"
प्रश्न 2. भारत हर साल लाखों ग्रेजुएट तैयार करता है, फिर भी कंपनियां स्किल गैप की बात करती हैं। इस अंतर को कैसे दूर किया जा सकता है?
बब्बर का मानना है कि असली समस्या स्किल गैप नहीं, बल्कि एप्लिकेशन गैप है। वे कहते हैं, "मेरी नजर में भारत में कौशल की कमी नहीं है, बल्कि सीखी हुई चीजों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने की कमी है।" उनका कहना है कि भारतीय विश्वविद्यालय प्रतिभाशाली छात्रों को तैयार करते हैं, लेकिन कई छात्रों को पढ़ाई के दौरान उद्योग का व्यावहारिक अनुभव नहीं मिल पाता। इसलिए वे नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते। इस अंतर को कम करने के लिए विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।
बब्बर सुझाव देते हैं कि छात्रों को केवल कक्षा तक सीमित न रखकर इंटर्नशिप, लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्ट, रिसर्च, स्टार्टअप प्रोग्राम और इनोवेशन चैलेंज में भाग लेने के अवसर दिए जाने चाहिए। आज कंपनियां केवल तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि समस्या समाधान, संवाद कौशल, टीमवर्क, डिजिटल समझ, अनुकूलन क्षमता और लगातार सीखने की इच्छा जैसे गुणों को भी महत्व देती हैं। वे कहते हैं, "तकनीक लगातार बदलती रहेगी, लेकिन सीखने, खुद को बदलने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता हमेशा सबसे महत्वपूर्ण रहेगी।"
बब्बर का मानना है कि विश्वविद्यालयों के इनक्यूबेशन सेंटर छात्रों में नेतृत्व, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करते हैं, जिससे उनकी रोजगार क्षमता भी बढ़ती है। वे बताते हैं कि Amity Innovation Incubator में छात्र उद्योग विशेषज्ञों के साथ काम करते हैं, स्टार्टअप बनाते हैं और वास्तविक बाजार की समस्याओं को हल करने का अनुभव प्राप्त करते हैं। अंत में वे कहते हैं, "रोजगार योग्य युवाओं को तैयार करना केवल विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योग, सरकार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलकर काम करना होगा।"
प्रश्न 3. AI आधारित और तेजी से बदलती दुनिया में सफल होने के लिए छात्रों के पास कौन-कौन से कौशल होना जरूरी है?
बब्बर का कहना है कि भविष्य में केवल तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होगा। वे कहते हैं, "भविष्य उनका है, जो AI के साथ मिलकर काम करना सीखेंगे, उससे मुकाबला करने की कोशिश नहीं करेंगे।" उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण कौशल है लगातार सीखने की क्षमता (Learning Agility)।
तकनीक तेजी से बदल रही है। इसलिए छात्रों को जीवनभर सीखने, पुरानी चीजें छोड़ने और नई चीजें अपनाने की आदत विकसित करनी होगी। इसके अलावा आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और समस्या समाधान भी बेहद जरूरी होंगे। जैसे-जैसे AI कंटेंट तैयार करने, डेटा विश्लेषण और सामान्य कामों को ऑटोमेट करेगा, वैसे-वैसे इंसानों की समझ, निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मक सोच की अहमियत और बढ़ेगी। वहीं बब्बर का मानना है कि नवाचार और उद्यमी सोच भी भविष्य के नेताओं की पहचान होगी।
वे कहते हैं, "आज कंपनियां ऐसे लोगों की तलाश कर रही हैं, जो नए अवसर पहचान सकें, नई समस्याओं का समाधान कर सकें और नया मूल्य (Value) पैदा कर सकें।" इसके साथ ही वे यह भी मानते हैं कि कम्युनिकेशन, नेतृत्व, भावनात्मक समझ (Emotional Intelligence), सहानुभूति और टीम को प्रेरित करने की क्षमता जैसी मानवीय खूबियों की जगह AI कभी नहीं ले सकता। इसीलिए विश्वविद्यालयों को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां छात्र किताबों के साथ-साथ शोध, उद्योग और उद्यमिता से भी जुड़ें।
बब्बर बताते हैं कि Amity Innovation Incubator में सबसे सफल छात्र वे नहीं होते जिनके पास सबसे मजबूत तकनीकी ज्ञान होता है, बल्कि वे होते हैं जिनमें जिज्ञासा, सीखने की इच्छा, अनुकूलन क्षमता और नए विचारों को सफल व्यवसाय में बदलने का साहस होता है। वे कहते हैं, "हमारा उद्देश्य केवल AI का उपयोग करने वाले छात्र तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार इनोवेटर तैयार करना है जो तकनीक के जरिए समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकें।"
प्रश्न 4. क्या विश्वविद्यालयों के इनक्यूबेटर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनते जा रहे हैं? उनकी ऐसी क्या भूमिका है, जो पारंपरिक संस्थाएं अक्सर नहीं निभा पातीं?
ओजस्वी बब्बर का मानना है कि आज विश्वविद्यालय आधारित इनक्यूबेटर (University Incubators) भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बनकर उभर रहे हैं। वे कहते हैं कि जब भारत नवाचार आधारित आर्थिक विकास और अधिक उद्यमियों को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब विश्वविद्यालयों के इनक्यूबेशन सेंटर शुरुआती स्तर पर ही युवाओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
"अधिकांश विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर ऐसे उद्यमियों के साथ काम करना शुरू कर देते हैं, जिनकी कंपनी अभी बनी भी नहीं होती। यही उन्हें पारंपरिक स्टार्टअप सहायता संस्थाओं से अलग बनाता है।"
बब्बर बताते हैं कि जहां पारंपरिक इनक्यूबेटर या निवेशक आमतौर पर उन स्टार्टअप्स के साथ काम करते हैं जिन्होंने बाजार में कुछ सफलता हासिल कर ली हो, वहीं विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर छात्रों और शोधकर्ताओं को शुरुआती चरण में ही बिजनेस आइडिया को समझने, ग्राहक की जरूरत पहचानने, बिजनेस मॉडल तैयार करने और मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (MVP) विकसित करने में मदद करते हैं।
इस शुरुआती मार्गदर्शन से स्टार्टअप के सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वे कहते हैं कि विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर शिक्षा, शोध, उद्योग और उद्यमिता को एक साथ जोड़ते हैं। इसके कारण वे छात्रों को अनुभवी मेंटर्स, विशेषज्ञ शिक्षकों, प्रयोगशालाओं, उद्योग साझेदारों, निवेशकों और मजबूत नेटवर्क का लाभ उपलब्ध करा पाते हैं। बब्बर के अनुसार इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां छात्रों को प्रयोग करने और असफल होने की आजादी मिलती है।
"छात्रों को ऐसा सुरक्षित माहौल चाहिए, जहां वे नए विचारों पर काम कर सकें, गलतियों से सीख सकें और लगातार खुद को बेहतर बना सकें। विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर यही अवसर देते हैं।" वे कहते हैं कि इनक्यूबेटर केवल स्टार्टअप्स की मदद नहीं करते, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय में उद्यमिता की संस्कृति विकसित करते हैं। इससे छात्र नौकरी पाने के बजाय रोजगार देने और समाज की समस्याओं का समाधान करने की दिशा में सोचने लगते हैं।
Amity Innovation Incubator के अनुभव का उल्लेख करते हुए बब्बर कहते हैं कि व्यवस्थित मेंटरशिप, उद्योग से जुड़ाव और लगातार मार्गदर्शन ने कई शुरुआती स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। वे कहते हैं, "भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का भविष्य केवल निवेश पर नहीं, बल्कि ज्ञान, मार्गदर्शन, प्रयोग करने की स्वतंत्रता और मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम पर भी निर्भर करेगा। विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर यह सब उपलब्ध कराने की क्षमता रखते हैं।"
प्रश्न 5. भारत में मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम बनाने के लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच किस तरह का सहयोग जरूरी है?
बब्बर का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का इनोवेशन इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हुआ है। इसमें सरकार की नीतियों, स्टार्टअप संस्कृति, उद्योगों की भागीदारी और शिक्षा संस्थानों की अहम भूमिका रही है। हालांकि, उनका मानना है कि अब अगला बड़ा कदम इन सभी पक्षों के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर करेगा।
वे कहते हैं, "हर पक्ष की अपनी अलग भूमिका है, लेकिन सबसे बड़ा प्रभाव तब दिखाई देता है, जब सभी एक साझा लक्ष्य के साथ मिलकर काम करते हैं।" बब्बर के अनुसार विश्वविद्यालय प्रतिभाशाली छात्र, शोध और नए विचार देते हैं। उद्योग बाजार की जरूरत, तकनीक, संसाधन और व्यावहारिक अनुभव लेकर आता है, जबकि सरकार नीतियों, फंडिंग और राष्ट्रीय नवाचार योजनाओं के जरिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। "सबसे बड़े अवसर तब पैदा होते हैं, जब ये तीनों मिलकर काम करते हैं, न कि अलग-अलग।" वे मानते हैं कि भारत में ऐसे और अधिक प्लेटफॉर्म बनने चाहिए, जहां छात्र, शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्योग, निवेशक और नीति निर्माता शुरुआती चरण से ही एक-दूसरे के साथ जुड़ सकें।
बब्बर का कहना है कि उद्योगों को विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर रिसर्च, इंटर्नशिप, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, पायलट प्रोजेक्ट और इनोवेशन प्रोग्राम चलाने चाहिए। इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और शोध भी उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होगा। साथ ही विश्वविद्यालयों को भी ऐसा शोध बढ़ावा देना चाहिए, जो केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि नए उत्पादों, सेवाओं और स्टार्टअप्स का रूप ले सके।
वे Startup India जैसी सरकारी पहलों की सराहना करते हुए कहते हैं कि इन कार्यक्रमों ने पूरे देश में उद्यमिता की संस्कृति को मजबूत किया है। उनका मानना है कि यदि सरकार रिसर्च को व्यवसाय में बदलने, विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर और डीप-टेक स्टार्टअप्स को लगातार समर्थन देती रही, तो भारत वैश्विक इनोवेशन हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
Amity Innovation Incubator के अनुभव का जिक्र करते हुए वे कहते हैं, "बड़े बदलाव अकेले संभव नहीं होते। जब अलग-अलग क्षेत्र अपनी ताकत और अनुभव को साझा करते हैं, तभी वास्तविक और प्रभावशाली नवाचार सामने आते हैं।" वे मानते हैं कि शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत सहयोग भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी, नवाचार-आधारित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
प्रश्न 6. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से उद्योगों को बदल रहा है। ऐसे में अमिटी यूनिवर्सिटी अपने छात्रों को भविष्य के नेतृत्व के लिए कैसे तैयार कर रही है?
ओजस्वी बब्बर का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा की दुनिया को तेजी से बदल रहा है और Amity University इस बदलाव को पूरी तरह अपनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल छात्रों को AI टूल्स चलाना सिखाना नहीं है, बल्कि ऐसे भविष्य के नेता तैयार करना है जो तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करते हुए नवाचार कर सकें। वे कहते हैं, "हम AI को पाठ्यक्रम, पढ़ाने के तरीके, मूल्यांकन प्रणाली और फैकल्टी डेवलपमेंट का हिस्सा बना रहे हैं, ताकि छात्रों को भविष्य के अनुरूप शिक्षा मिल सके।"
भारत में ऑनलाइन उच्च शिक्षा के बड़े संस्थानों में शामिल अमिटी, AI आधारित टीचिंग असिस्टेंट, व्यक्तिगत (Personalised) लर्निंग और नई डिजिटल शिक्षण पद्धतियों पर काम कर रहा है, जिससे छात्रों की सीखने की गुणवत्ता और बेहतर हो सके।
बब्बर का मानना है कि AI ने शिक्षा का उद्देश्य ही बदल दिया है। "अब शिक्षा केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं है। AI की मदद से हम छात्रों में मौलिक सोच, रचनात्मकता, डिजाइन थिंकिंग और ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।" वे बताते हैं कि विश्वविद्यालय AI का उपयोग शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी कर रहा है। अब तक अमिटी के शोधकर्ताओं ने करीब 3,000 पेटेंट दाखिल किए हैं, जिनमें से 600 से अधिक पेटेंट मंजूर हो चुके हैं। यह विश्वविद्यालय के मजबूत शोध और तकनीकी विकास को दर्शाता है।
छात्रों को नई तकनीकों पर प्रयोग करने, विभिन्न विषयों के साथ मिलकर काम करने और लगातार नए कौशल सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वहीं बब्बर कहते हैं, "भविष्य के नेता वही होंगे जो लगातार सीखने, पुरानी चीजें छोड़ने और नई चीजें अपनाने की क्षमता रखते होंगे।" वे यह भी बताते हैं कि अमिटी ने अत्याधुनिक रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। विश्वविद्यालय में 10 पेटाफ्लॉप्स क्षमता वाला सुपरकंप्यूटर सेंटर स्थापित किया गया है, जो उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली अकादमिक सुपरकंप्यूटिंग केंद्रों में से एक है। अब इसकी क्षमता बढ़ाकर 60 पेटाफ्लॉप्स करने की तैयारी चल रही है।
इन सुविधाओं की मदद से विश्वविद्यालय ISRO, DRDO और ICMR जैसी प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर उन्नत शोध कर रहा है। बब्बर अंत में कहते हैं, "हमारा उद्देश्य केवल छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे इनोवेटर, उद्यमी, शोधकर्ता और जिम्मेदार वैश्विक नेता बनाना है, जो भविष्य को स्वयं आकार दें।"
निष्कर्ष : भारत जैसे-जैसे वैश्विक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे विश्वविद्यालयों की भूमिका भी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। आज उच्च शिक्षा संस्थानों से केवल डिग्री देने की नहीं, बल्कि नवाचार को बढ़ावा देने, शोध को समाज तक पहुंचाने, स्टार्टअप्स को विकसित करने और उद्योग तथा सरकार के साथ मिलकर भविष्य की चुनौतियों का समाधान तैयार करने की अपेक्षा की जा रही है।
ओजस्वी बब्बर का मानना है कि शिक्षा का भविष्य ऐसे इकोसिस्टम बनाने में है, जहां नए विचारों को आगे बढ़ने का अवसर मिले, शोध वास्तविक बदलाव लाए और छात्र केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नए अवसर और रोजगार पैदा करने वाले बनें।
उनकी सोच भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में आ रहे बड़े बदलाव को दर्शाती है। विश्वविद्यालय अब केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण के प्रमुख केंद्र बनेंगे। यदि यह परिवर्तन इसी गति से जारी रहा, तो विश्वविद्यालय आधारित इनोवेशन इकोसिस्टम आने वाले वर्षों में भारत के नए उद्यमियों, शोधकर्ताओं और वैश्विक नवाचार नेताओं को तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।