महाराष्ट्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में 2024-25 के दौरान 19% की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन 2025-26 में इसमें फिर से सुधार देखने को मिला और रजिस्ट्रेशन में 13% की वृद्धि हुई। यह जानकारी राज्य के नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में 1 जनवरी 2026 तक कुल मोटर वाहनों की संख्या बढ़कर 5.3 करोड़ हो गई, जो एक वर्ष पहले 4.9 करोड़ थी। इस वृद्धि में दोपहिया वाहनों का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिनकी संख्या 3.5 करोड़ से बढ़कर 3.8 करोड़ हो गई। वहीं सड़कों पर वाहन घनत्व भी बढ़कर 153 वाहन प्रति किमी तक पहुंच गया, जिससे सड़क अवसंरचना पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष ईवी की मांग में आई गिरावट का एक बड़ा कारण खरीदारों के बीच रेंज एंग्जायटी और पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी, खासकर बड़े शहरों के बाहर। हालांकि पिछले एक साल में राज्यभर में, विशेष रूप से हाईवे पर, अधिक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित होने से स्थिति में सुधार आया है। इसके अलावा बिजली कंपनियों द्वारा हाउसिंग सोसाइटियों में ईवी चार्जिंग कनेक्शन के लिए रियायती बिजली दरें उपलब्ध कराने से भी चार्जिंग लागत कम हुई है।
ईवी बाजार में सुधार का एक और कारण नए मॉडलों की बढ़ती उपलब्धता रही। पिछले वर्ष कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने हैचबैक, SUV और प्रीमियम सेगमेंट में नए इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च किए, जिससे उपभोक्ताओं के लिए विकल्प बढ़े। खास तौर पर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों ने ईवी अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि उनकी शुरुआती लागत कम है और वे शहरी आवागमन के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
दिसंबर 2025 तक महाराष्ट्र में 9,27,061 बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEVs) पंजीकृत थे। राज्य की ईवी नीति का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग और निर्माण को बढ़ावा देना, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना, सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण को प्रोत्साहित करना तथा रिसर्च, इनोवेशन और कौशल विकास के माध्यम से महाराष्ट्र को एक प्रमुख ईवी हब के रूप में विकसित करना है।