मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की उपस्थिति में यह समझौता संपन्न हुआ।
यह समझौता पेटेंट जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण और संस्थागत सहयोग को भी नई दिशा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय पारंपरिक ज्ञान की वैश्विक सुरक्षा मजबूत होगी और दोनों देशों के बीच शोध एवं शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
दुनिया का पहला पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय
भारत ने पारंपरिक ज्ञान के दुरुपयोग और गलत पेटेंट को रोकने के लिए दुनिया का पहला Traditional Knowledge Digital Library (TKDL) विकसित किया है। इस समझौते के तहत IP Australia को TKDL डेटाबेस तक पहुंच मिलेगी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई पेटेंट कार्यालय पेटेंट आवेदनों की जांच के दौरान भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़े पूर्व रिकॉर्ड (Prior Art) की पहचान कर सकेगा।
5.2 लाख से अधिक पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संग्रह
वर्ष 2001 में CSIR और आयुष मंत्रालय की संयुक्त पहल से स्थापित इस डिजिटल डेटाबेस में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और योग से जुड़े 5.2 लाख से अधिक सूत्रों और पारंपरिक उपचारों का विवरण शामिल है। इसे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश सहित पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, ताकि दुनिया भर के पेटेंट परीक्षक इसका उपयोग कर सकें।
CSIR के अनुसार, TKDL की मदद से अब तक भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़े 375 से अधिक गलत पेटेंट आवेदनों को रद्द, संशोधित या वापस कराया जा चुका है। IP Australia के साथ हुए इस समझौते के बाद अब दुनिया के 18 प्रमुख पेटेंट कार्यालयों को गोपनीयता समझौते (NDA) के तहत इस डेटाबेस तक पहुंच प्राप्त है।
शिक्षा और शोध सहयोग को मिलेगी नई गति
University of Wollongong India के कैंपस डायरेक्टर प्रो. निमय कल्याणी का कहना है कि यह समझौता केवल पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण के क्षेत्र में भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग को नई दिशा देगा। उनके अनुसार, छात्र गतिशीलता (Student Mobility) के साथ अब संस्थागत सहयोग, डिग्रियों की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) और एकीकृत शिक्षा मार्ग (Integrated Education Pathways) पर भी तेजी से काम हो रहा है, जिससे दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि GIFT City जैसे वैश्विक वित्तीय एवं प्रौद्योगिकी केंद्रों में स्थापित अंतरराष्ट्रीय शाखा परिसरों (International Branch Campuses) के माध्यम से छात्रों को भारत में ही विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी। साथ ही, यह मॉडल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रतिभा, शोध और उद्योग आधारित इकोसिस्टम तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को मिला नया आयाम
गौरतलब है कि CSIR-TKDL समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित 18 प्रमुख द्विपक्षीय परिणामों में शामिल है। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। वहीं विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि यह समझौता भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को वैश्विक स्तर पर सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत-ऑस्ट्रेलिया की दीर्घकालिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा।